FREEDOM OF SPEECH Ka Anokha Tarika - HORN OK PLEASE!

ट्रकों के पीछे लिखी शायरी कभी आपने पढ़ी हैं ?

हॉर्न ओके प्लीज, बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला, कृपया सावधानी बरतें। ये स्लोगन आपको कहां देखने को मिलते हैं? जवाब यही होगा- ट्रक या टेंपो। आज हम आपको कुछ ऐसे दिलचस्प स्लोगन या मैसेज के बारे में बताते हैं, जिन्हें आप इन ट्रक-टेंपो की बैक साइड यानी पीछे लिखे हुए हम सब पढ़ते हैं। इन स्लोगन के पीछे क्या वजह होती है? किन बातों को ध्यान में रखकर यह स्लोगन लिखे जाते हैं। आइए आपको बताते हैं।

स्लोगन लिखने का सिलसिला सदियों से चल रहा है। यह प्रक्रिया सबसे पहले शायरी से शुरू हुई थी। इसमें सबसे पहले सड़क परिवहन सुरक्षा के नियमों से जुड़े हुए स्लोगन लिखने शुरू किए गए थे। जैसे- जैसे इसका चलन शुरू हुआ धीरे- धीरे कई नए स्लोगन भी आए। हां, यह आपको बता दें कि ये स्लोगन कोई लेखक नहीं बल्कि खुद ट्रक ड्राइवर ही बनाते हैं। इनमें कई ऐसे भी मैसेज या स्लोगन होते हैं, जो इतने ज्यादा मनोंरजक, मजाकिया या फिर सामाजिक संदेश देने वाले होते हैं कि उन पर से नजरें नहीं हट पातीं। इन्हें लिखने का तरीका भी मजेदार होता है कि इन पर नजर चली ही जाती है।

क्या होती है स्लोगन लिखने की वजह

कम पढ़े लिखे लोगों की रोजी रोटी के इस साधन पर लिखे स्लोगन के कई मायने होते हैं। ज्यादातर स्लोगन को ड्राइवर की भावनाओं से जोड़कर देखा जा सकता है। दरअसल, घर बार से हफ्तों भर दूर रहकर मिलों का सफर तय करने के लिए वह अपने व्हीकल को अपनी दुल्हनिया मान बैठते हैं। स्लोगन के अलावा कमर्शियल व्हीकल को सजाने का एक कारण यह भी होता है कि वह मानते हैं कि अगर उनका व्हीकल देखने में सुंदर होगा, तो उनका बिजनेस बढ़ता है। सजाने पर सबसे ज्यादा ध्यान पाकिस्तान में देखने को मिलता है। आश्चर्य करेंगे, लेकिन अगर 10 लाख का व्हीकल होता है, तो उसको सजाने में मालिक 5 लाख रुपये तक भी खर्च कर देते हैं।

ये हैं सबसे पॉपुलर स्लोगन

कुछ ऐसे स्लोगन होते हैं, जो ज्यादातर व्हीकल पर कॉमन होते हैं। इन्हें गाड़ियों के पीछे लिखा जाता है। पीछे लिखने का कारण सिर्फ इतना होता है कि गाड़ी के पीछे आने वाले लोग इसे पढ़ सकें।

1. बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला
2. हॉर्न ओके प्लीज
3. हम दो हमारे दो
4. बजा होरन निकल फौरन
5. हम हैं राही प्यार के
6. देखो मगर प्यार से
7. नसीब अपना-अपना
8. जगह मिलने पर साइड दी जाएगी
9. जय जवान, जय विज्ञान, जय किसान
10. बुरी नजर वाले तेरा भी भलो हो

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ये हैं कुछ रोमांटिक स्लोगन

1. देख मत पगली प्यार हो जाएगा
2. वो कौन थी जो मुस्कुरा कर चली गई
3. मेरी हसीना को इतना मत घूर
4. देखो मगर प्यार से
5. मैं हूं रूप की रानी, बहारों की मलिका

ये हैं कुछ मजाकिया स्लोगन

सड़कों पर कुछ ऐसे भी कमर्शियल व्हीकल देखने में आते हैं, जिनके स्लोगन पढ़कर आप हंसे बिना नहीं रुकेंगे। जैसे मिनी टैंपो पर पीछे लिखा मिला कि ”बड़ी होकर ट्रक बनूंगी”।
ऐसे ही एक मिनी बस यानी आरटीवी चालक ने लिखा हुआ था, ”सुरेंद्र की हरी भरी, चलती है खरी- खरी।” इसके अलावा कुछ का अंदाज सबसे अलग होता है। देख के रहा है, थप्पड़ खाएगा के…या चल हट परे कू।

सड़क सुरक्षा से जुड़े स्लोगन

आमतौर पर आपने देखा होगा कि ट्रक-टेंपो के पीछे लिखे स्लोगन सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिखे जाते हैं। इनमें सबसे पॉपुलर होता है- हॉर्न औके प्लीज। यह स्लोगन इतना पॉपुलर है कि इसपर बकायदा बॉलीवुड में गाना भी लिखा जा चुका है। इसके अलावा कृप्या उचित दूर बनाएं रखें, सड़क पर नियमों का पालन करें, यूज डिपर ऐट नाइट (रात में डिपर का प्रयोग करें) भी काफी पॉपुलर स्लोगन हैं।

इसके पीछे नहीं है कोई नियम

ट्रक-टेंपो ड्राइवर इन स्लोगन को लिखने के लिए खुद सोचकर फैसला लेते हैं। दिल्ली के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की मानें तो कमर्शियल व्हीकल पर स्लोगन लिखने को लेकर कोई नियम कानून नहीं है। ड्राइवर अपनी मर्जी से इन्हें लिखते हैं। इन स्लोगन के लिखने में हॉर्न ओके प्लीज, पब्लिक कैरियर, यूज डीपर एट नाइट जैसे कोट सुरक्षा की दृष्टि से लिखे जाते हैं। बाकी सभी स्लोगन को लिखने के पीछे का कारण ड्राइवर का शौक होता है। इन स्लोगन को परचेज करने के बाद एसेसरीज शॉपकीपर लगाते हैं, ताकि व्हीकल दिखने में सुंदर लगे।

Image source: Beingtraveller.com, bizarreculture.com

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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