इलेक्ट्रिक शॉक से बढ़ती है महिलाओं में उत्तेजना, पढ़िए और जानिए कैसे?

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे ही महिलाओं में सैक्स के प्रति उत्तेजना कम होने लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर महिलाओं की एड़ियों में करंट लगाया जाए, तो उनकी जिंदगी में कामेच्छा यानी आर्गेजम का सुख दोबारा लाया जा सकता है।

एक ताजा स्टडी में पाया गया है कि आधी से ज्यादा महिलाएं उम्र के एक पढ़ाव पर आकर सैक्स के प्रति रुचि कम दिखाती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्तेजना कम होना ही है। इसका असर यह होता है कि महिलाएं अपनी सैक्स लाइफ इंजॉय करना बंद कर देती हैं, जिसका नुकसान यह होता है कि उनमें कामेच्छा नहीं बचती।

यूनिवर्सिटी ऑफ मिचीगन में की गई स्टडी में पता चला है कि महिलाओं की एड़ियों में एक नस होती है, जहां करंट लगने या अचानक हिट करने से महिलाओं में कामोत्तेजना बढ़ती है। रिसर्च में कुछ महिलाओं पर यह स्टडी की गई है, जिसमें महिलाओं पर एक हफ्ते के भीतर 12 बार 30-30 मिनट के लिए यह एक्सरसाइज कराई जाती थी। स्टडी में शामिल रहीं 53 साल की महिला का कहना है कि वैसे तो यह एक नशा है, जिसके आप आदी भी हो सकते हैं। लेकिन इसका परम सुख लेने में आनंद भी आता है।

इस स्टडी में आठ महिलाओं को शामिल किया गया था। इन महिलाओं का मानना था कि उन्हें इस तरीके से नेचुरल ऑर्गेजम यानी चरम-आनंद सुख प्राप्त हुआ है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मिचिगन के मुताबिक, यह स्टडी सबसे पहले चुहे पर की गई थी, जिसमें सफलता हासिल करने के बाद इसे महिलाओं पर लागू किया गया। इस स्टडी पर काम करने वाले डॉक्टर टिम ब्रुन्स ने बताया कि , जब भी आप किसी भी स्टडी को करते हैं और आपको 50 फीसदी सफलता हासिल होती है, तो मान लीजिए आप सफल हो चुके हैं।

टिम ने बताया कि एक महिला ने उन्हें स्टडी के बाद बताया कि उन्हें ऑग्रेज्म की वापसी 100 फीसदी हासिल नहीं हो पाई है, लेकिन अब वह अपने चरम आनंद पर पहुंच जाती हैं और उससे उन्हें कामेच्छा का सुख मिलता है। स्टडी से जुड़ी डॉक्टर प्रियंका गुप्ता बताती हैं कि स्टडी ने एक ऐसा तरीका इजात किया है, जिसके बाद महिलाओं को किसी भी दवाई आवश्यकता नहीं है। वह कहती हैं कि 20 साल से मर्दों के लिए वायग्रा दवाई सहारा है, जबकि महिलाओं के लिए वैज्ञानिक आज तक कोई भी दवाई इजात नहीं कर पाए, जिससे महिलाओं की उत्तेजना को दोबारा या बढ़ाया जा सके।

Content Source: www.dailymail.co.uk
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त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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