Acrobatic Yoga Ke Ustad Hai Delhi Ke Ye Nanhe Surdas | NightBulb.in

योग के उस्ताद हैं दिल्ली के ये नन्हें सूरदास

दिल्ली के एक छोटे से इलाके में रहने वाले ये नेत्रहीन बच्चे दुनिया भर में अपना नाम कमा रहे हैं। यह बच्चे योग में बड़े – बड़े योग गुरूओं को मात दे सकते हैं। योग के प्रति उनकी लगन देखकर आप अपने दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। योग में भी सबसे कठिन ‘एक्रोबेटिक योग'(Acrobatic Yoga) करने वाले इन नेत्रहीन बच्चों की एक अनोखी कहानी आपके सामने पेश कर रहे हैं। जानिए इन बच्चों की खासियत –

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ASIA BOOK OF RECORDS में नाम है दर्ज और दर्जनों मिल चुके हैं अवार्ड

  • इन बच्चों का नाम ASIA BOOK OF RECORDS और INDIA BOOK RECORDS में दर्ज है। यह इंडिया की पहली एक्रोबेटिक योग करने वाली दिव्यांगो की टीम है।
  • इन्हें मशहूर सिंगर और रैपर Raftaar ने भी सम्मानित किया हुआ है।
  • इस टीम ने दूरदर्शन के शो मेरी आवाज़ सुनो, कलर्स टी वी के शो इंडिया बनेगा मंच, जीटीवी के शो बिग सेलेब्रिटी चैलेंज इंटरनेशनल में अपने हुनर का प्रदर्शन किया हुआ है। इसके अलावा बच्चे कई नेशनल व स्टेट अवार्ड भी जीत चुके हैं।

ऐसे सीखा इन्होंने एक्रोबेटिक योगा(Acrobatic Yoga)

आंखों से न देखने वाले बच्चे अपनी पिक-अप पावर से एक्रोबेटिक योग सीखने में कामयाब हो पाए हैं। इन बच्चों को यह कला सिखाने वाले इनके गुरू हेमंत शर्मा जी हैं। हेमंत जी बताते हैं कि साल 2010 में उन्होंने इन बच्चों को योग सिखाना शुरू किया था। शुरूआत में बच्चों को प्राणायाम, सूर्य नमस्कार जैसे योग ही सिखाए। शुरूआत में इन बच्चों को काफी परेशानी हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह बच्चे एक्रोबेटिक के मास्टर बन गए। इनकी ललक ही है, जो आज ये बच्चे दुनिया भर में अपना नाम रोशन कर रहे हैं। अब इन बच्चों को सिर्फ एक बार बोला जाता है और यह बच्चे तुरंत एक्रोबेटिक योग करके दिखा देते हैं। इन्हें एक्रोबेटिक योग सिखाने के लिए छोटी- छोटी कलाओं के बारे में समझाया गया था। इसे समझााने के बाद उन्हें कई कठिन योग कला भी सिखााई गई।

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छूकर पता लगाते हैं अपना पार्टनर

हेमंत बताते हैं कि एक्रोबेटिक योग दो व दो से अधिक लोगों के साथ मिलकर ही किया जा सकता है। इसे करने के लिए बच्चों को एक दूसरे का सहारा लेना होता है। एक दूसरे के साथ तालमेतल बिठाने के लिए वे खास तरीके इस्तेमाल करते हैं। एक-दूसरे को छूकर वह अपने पार्टनर की पहचान करते हैं, जिसके बाद ही वे एक्रोबेटिक योग करते हैं। इसके अलावा यह नाम के जरिए भी अपने आस-पास खड़े होने वाले पार्टनर को बुलाते हैं। दरअसल, एक्रोबेटिक योग में 10 से 20 के साथ मिलकर भी योग क्रियाएं की जाती हैं।

एक्रोबेटिक योग(Acrobatic Yoga) करना आसान नहीं

एक्रोबेटिक योग में दो लोगों का आपसी तालमेल और समझ बहुत जरूरी होती है। एक दूसरे पर आंख बंद करके भरोसा करना होता है, तभी योगा के वह स्टैप किये जा सकते हैं। हालांकि, भारत में बहुत सी एक्रोबेटिक योग करने वाली टीम मौजूद हैं, जो एक दूसरे की मदद से अलग-अलग तरह की योग क्रियाएं चुटकियों में कर देते हैं। मगर यही एक्रोबेटिक योग(Acrobatic Yoga) जब कोई बिना देखे करे तो अच्छे खासे इंसान की उंगली दांतों के बीच जरूर आ जाएगी।

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दिल्ली के पश्चिम विहार में रहते हैं यह बच्चे 

ये बच्चे पश्चिम विहार स्थित अखिल भारतीय नेत्रहीन संघ नाम की एक एनजीओ में पढ़ाई करते हैं। इनमें कई ऐसे बच्चे हैं, जो यूपी व बिहार से यहां आए हैं। एनजीओ इन बच्चों को न सिर्फ पढ़ाती है, बल्कि उन्हें हॉस्टल, खान-पान की भी सुविधा देती है। कुछ बच्चे पीतमपुरा स्थित एसडी पब्लिक स्कूल से भी हैं। एक्रोबेटिक योग करने वाले इन बच्चों की संख्या 100 के करीब है, जिनमें बच्चों की उम्र 8 से 18 के बीच है।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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