तेरी वो मुस्कान हो या...| NightBulb.in - Hindi Blog, Hindi Poem, Poetry

तेरी वो मुस्कान हो या…

तेरी वो मुस्कान हो या फिर आँखों की चमक
बालों की परछाईं हो या फिर साँसों की महक

दिल में जब तक धड़कन है उन्हें भुला नहीं सकता
अपने इरादों को मरते दम तक झुठला नहीं सकता

माना कि मेरा रास्ता तंग ज़रूर है
माना कि तुझे पाना मेरे लिए कठिन है

लेकिन मेरे दिल से तेरा कनेक्शन कोई काट नहीं सकता
मेरी आशिक़ी की गहराइयों को कोई नाप नहीं सकता

हाँ मैं मानता हूँ अब कुछ बचा नहीं है मुझमें ऐसा जो तुझे पसंद आए
हाँ मैं मानता हूँ तेरी ज़रूरतों में मेरा अब कोई नामों निशा नहीं

लेकिन तेरे दिल से मुझे तू ख़ुद निकाल नहीं सकता,
मेरी आँखों की नमी को कोई छुपा नहीं सकता.

 

Image Source: www.shynesssocialanxiety.com

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

Leave a reply:

Your email address will not be published.

Site Footer