गहने-अंगूठी के डिजाइनर बनकर भरिए अपनी तिजोरी

हीरे-जवाहारात को मुसीबत और जरूरत के समय में विपत्तिकाल का संबल माना जाता है। युगों से नारियों के दिल में आभूषणों के प्रति लालसा रही है। हीरे-जड़ित बालियों या रूबी के पेंडेंट के बिना नारी का श्रृंगार अधूरा माना जाता है। यही नहीं, पुरुष भी हीरे-जवाहरात के प्रति समान रूप से आकर्षित हो रहे हैं।

  • लोग आभूषणों को फैशन या प्रतिष्ठा का प्रतीक ही नहीं मानते, बल्कि यह निवेश का भी एक महत्वपूर्ण साधन है। वस्तुत:भारतीय उद्योग का आभूषणों में कुल 43 प्रतिशत हिस्सा है। इसके साथ ही रत्नों का प्रतिवर्ष 70 हजार करोड़ रुपए से अधिक का पूरे विश्व में निर्यात किया जाता है।

 

  • हालांकि, आभूषणों का डिजाइन तैयार करना बहुत पुराना व्यवसाय है, फिर भी फैशन और बदलते वक्त को देखते हुए डिजाइन का काम परंपरा से हटकर है। फैशन की दुनिया में इसकी प्रधानता रही है और यह नित नए फैशन का रूप लेता जा रहा है। आज आभूषणों की डिजाइनिंग के लिए अनुभव और नए डजाइन घड़ने की इच्छा की जरूरत है, ताकि ग्राहक की बदलती रुचियों और अपेक्षाओं के अनुसार नए डिजाइन तैयार किए जा सकें।

 

  • इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए व्यक्ति को फैशन में आनेवाले परिवर्तनों तथा रुझानों के अनुरूप बनना होगा तथा उसे बाजार की आवश्यकताओं को आंकने में कुशलता प्राप्त करनी होगी। रंग की सौंदर्यानुभूति तथा लावण्य का बोध होना जरूरी है।

 

  • इस काम में धातु कर्म तथा रत्न विज्ञान के बारे में आधारभूत जानकारी होनी चाहिए। साथ ही वर्तमान शैली, विशद योजना और नए डिजाइनों की मार्केटिंग में गहन दृष्टि होनी चाहिए। पैटर्न पर विचार करने के बाद डिजाइनर प्राय: कागज पर विस्तृत स्केच बनाता है, नमूने के तौर पर मॉडल तैयार करता है और फिर ग्राहकों को खोजता है।

 

  • हालांकि सोना, चांदी, हीरे, मोती और अन्य कीमती पत्थर जेवरात के सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम रहे हैं लेकिन आजकल डिजाइनर लकड़ी, पीतल, तांबा, शैल, कांच और यहां तक कि सूखे फूलों और पेपियर मैश जैसी सामग्री का भी प्रयोग कर रहे हैं। जेवरात डिजाइनर के रूप में आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप पारंपरिक वस्तुओं से लेकर समकालीन भारी-भरकम तथा हल्के जेवरों तक व्यापक रेंज में शामिल समस्त जेवरात तैयार कर सकें।

 

  • यह विश्व के किसी भी कोने में नौकरी का व्यापक क्षेत्र है। कुछ अपने कारोबार में धीरे-धीरे जेवरात की अलग ब्रांड या लाइनें विकसित कर लेते हैं। किसी भी कारोबार को आरंभ करने से पूर्व आपको यह ध्यान रखना है कि जेवरात डिजाइनिंग में भारी मात्रा में निवेश की आवश्यकता रहती है। भारत के परंपरागत सुनार तथा डिजाइनर का जोर हमेशा निर्यात बाजार पर रहा है।

 

  • आभूषण डिजाइनिंग के क्षेत्र में युवा पीढ़ी के लिए अनेक अवसर हैं, ताकि घरेलू बाजार विशेषत: स्वतंत्र रूप से आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके। डि-बीयर्स, एंचेंट तथा स्वारोव्स्की जैसे अंतर्राष्ट्रीय नाम जेवरात के जाने पहचाने ब्रांड बन चुके हैं। युवा वर्ग और सर्जनात्मक रुचि के लोगों में यह क्षेत्र लोकप्रिय होता जा रहा है।

Leave a reply:

Your email address will not be published.

Site Footer