Diwaliya Pakistan, Karja Utarne Ke Liye Bech Raha Hai Car-Bhaish

दिवालिया पाकिस्तान, कर्जा उतारने के लिए बेच रहा है कारें-भैंस

एक तरफ पाकिस्तान(Pakistan) भारत को पूंछ दबाए यहां तक कह रहा है कि हम युद्ध के लिए तैयार हैं। वहीं, दूसरी ओर, इस देश के हालात इतने बुरे आ चुके हैं कि पाकिस्तान(Pakistan) के प्रधानमंत्री के काफिले की 61 गाड़ियां आज बेचने की कगार पर आ चुकी हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि पाकिस्तान(Pakistan) अब दिवालिया हो रहा है।

पाकिस्तान(Pakistan) के प्रधानमंत्री आवास के एडमिनिस्ट्रेटर मैजर आसिफ के मुताबिक, पाकिस्तान आवास के 102 में से 51 गाड़ियों को ऑक्शन के लिए रखा गया है। यह सभी गाड़ियां अब बेच दी जाएंगी, ताकि पाकिस्तान(Pakistan) पर से  विश्व बैंक, अमेरिका और इंटरनेशनल म्यूडिटी फंड का कर्जा चुकाया जा सके।

हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान जिसे अपना सबसे खास दोस्त कहता है, उसने भी पाकिस्तान के इस बुरे वक्त में मदद करने से मना कर दिया है। पाकिस्तान(Pakistan) के खास दोस्त कहे जाने वाले पीपल रिपब्लिक ऑफ चाइना ने इस वक्त में पाकिस्तान की मदद करने से साफ मना कर दिया है और अपने कदम पीछे ले लिए हैं।पाकिस्तान की एड्रमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास के अंतर्गत आने वाली 102 गाड़ियों के लिए अभी तक खरीददार नहीं मिले हैं। लेकिन इनकी ऑक्शन में कुल मिलाकर कीमत 1 बिलियन डॉलर है।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान के हालात इस बात से भी पता चल रहे हैं कि पाकिस्तान ने अपनी भैंसे तक निलाम करनी शुरू कर दी हैं। इसके अलावा चार हेलीकॉप्टर भी निलामी के लिए रखे हैं। मैजर आसिफ ने बताया कि बम निरोधक दो गाड़ियों के लिए अभी तक मालिक नहीं मिला है। हालांकि, 27 बम निरोधक गाड़ियां बिक चुकी हैं। इन गाड़ियों में मर्सडीज, बुलेटप्रूफ बीएमडब्लू, तीन एसयूवी और दो एसयूवी शामिल हैं। यह सभी गाड़ियां 2016 मॉडल हैं। इसके अलावा 40 गाड़ियां ऐसी भी हैं, जिनमें 2004 के मॉडल को भी निलामी में रखा गया है।

इन खबरों से बस एक भी बात सामने आती है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ मुहिम छेड़ने की जरूरत है, जिसमें पाकिस्तान का सबसे ज्यादा खर्च होता है।

Image Source : anmol77 – WordPress.com, www.samaatv.com

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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