सर्जिकल स्ट्राइक के मास्टरमाइंड की वो कहानी जो हर कोई नहीं जानता

साल था 2016 और दिन था 28 सितंबर और एक बदला। वो बदला जो उरी में मौजूद इंडियन आर्मी के हैडक्वार्टर में मारे गए निहत्थे और सोते हुए जवानों को चंद आतंकवादियों द्वारा मारे जाने पर लिया गया था। इसी घटना पर 11 जनवरी को रिलीज हुई फिल्म उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक में परेश रावल को सर्जिकल स्ट्राइक के मास्टर माइंड के तौर पर दिखाया गया है। यह किरदार हकीकत में भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोवाल हैं।

आज हम आपको अजीत डोवाल के पहले से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि काफी कम लोग जानते होंगे। 

  • अजीत डोवाल पाकिस्तान में भारतीय स्पाई यानी खुफिया के तौर पर सात साल बिता चुके हैं। अजीत डोवाल ही हैं, जिन्होने पाकिस्तानी आतंकवादियों से साल 1999 में कांधार प्लेन हाइजैक में पूरे मामले को संभाला था।

 

  • इतना ही नहीं, साल 1991 में रोमानियन डिप्लोमेट को बचाने में भी अजीत डोवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अजीत डोवाल ने सिख आतंकवादियों द्वारा किडनैप किए गए रोमानियन डिप्लोमेट ‘लिवियू राडो’ को रेस्कयू करवाया था।

 

  • ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान गोल्डन टेंपल यानी स्वर्ण मंदिर के अंदर छिपे सिख आतंकवादियों को भी सरेंडर करवाने में अजीत डोवाल की अहम भूमिका थी। अजीत डोवाल ने मंदिर में रिक्शेवाला बनकर एंट्री की, जिसके बाद उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया बताकर आतंकवादियों का समर्थन हासिल किया। अजीत डोवाल ने तुरंत आतंकवादियों की गतिविधियों का जायजा लिया और इंडियन गर्वमेंट को 200 आतंकवादियों के होने की जानकारी दी। असल में उस वक्त 40 आतंकवादी मंदिर में मौजूद थे। डोवाल चाहते थे कि सरकार एक्शन ले, नाकि मंदिर की बिजली और पानी काटकर अपना नरम रुख अपनाए।

 

  • अजीत डोवाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे खास और भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता है। इतना ही नहीं, जब बात देश की हो, तो अजीत डोवाल प्रधानमंत्री के बाद दूसरे सबसे पॉवरफुल व्यक्ति कहे जाते हैं, जो अपने बलबूते फैसले लेने में सक्षम हैं।

 

  • मोदी सरकार बनते ही सरकार के सामने एक बड़ा मामला सामने आ गया था। जून 2014 में ISIS के हमलों के दौरान इराक में भारत की नर्सें फंस गई थीं, जिन्हें रेस्कयू करने में भी अजीत डोवाल ‘टाइगर’ साबित हुए थे। टाइगर जिंदा है, फिल्म इसी मामले पर नाटकीय अंदाज में बनाई गई थी। अजीत डोवाल का यहां मास्टरमाइंड ऐसा काम आया कि खुद ISIS ने खुद नर्सों को सही सलामत इराक के हवाले किया, जहां से भारतीय आर्मी  अपने प्लेन से भारत वापस लेकर आई।

 

  • अजीत डोवाल ने सर्जिकल स्ट्राइक से कुछ समय पहले एक खास काम और भी किया था। म्यांमार में अजीत डोवाल और आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने एक ऑपरेशन चलाया था, जिसमें बिना किसी नुकसान के आर्मी ने 50 आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। दरअसल, उससे कुछ समय पहले 4 जून, 2015 के दिन कुछ आतंकवादियों ने 6 डोगरा रैजिमेंट पर हमला किया था, जिसमें 18 जवान मारे गए थे। इसे भारत की पहली सर्जिकल स्ट्राइक भी कहा जा सकता है, क्योंकि इंडियन आर्मी ने यह ऑपरेशन भारत की सीमाओं से बाहर जाकर म्यामांर में किया था।

 

  • अजीत डोवाल ने एक कार्यक्रम के दौरान अपनी एक दिलचस्प कहानी बताई थी, जिसको भी आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं-  “लाहौर में एक ओलिया की मजार है, जहां मैं गया। मजार से वापस आते हुए एक शख्स ने मुझे अपनी ओर बुलाया और मुझसे पूछा कि तुम हिंदू हो। मैंने कहा- नहीं तो। वह शख्स दो-चार गलियों से अपने घर ले गया, जहां उस शख्स ने फिर कहा- कि तुम हिंदू हो। मैंने पूछा- आपको ऐसा क्यूं लगता है। उसने कहा- तुम्हारे कान छिदे हुए हैं। आप अपने कान की प्लास्टिक सर्जरी करा लो, ऐसा घूमना ठीक नहीं। फिर उसने कहा- मुझे इसलिए पता चला, क्यूंकि मैं भी हिंदू हूं। यहां मैरे परिवार को मार डाला गया। इस बातचीत के दौरान उसने अपनी अलमारी में भगवान शिव और दुर्गा मां की तस्वीर दिखाई। (अजीत डोवाल ने यह जानकारी धर्मसकंट विषय पर सुनाई थी जिसके जरिए यह बताना चाहते थे कि पाकिस्तान में हिंदू किस तरह परेशान है)

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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