मन को हरने वाले नेता थे “मनोहर पार्रिकर”

मनोहर पार्रिकर जी की पुण्यतिथि पर आज हम आपको पार्रिकर जी की कुछ ऐसी खूबियां बताएंगे, जिन्हें पढ़कर ऐसा लगता है मानों वो व्यक्ति कोई राजनेता नहीं बल्कि एक माध्यम परिवार का सरल और मेहनती इंसान था. मनोहर पार्रिकर ने कभी दिखावे के लिए अपने सरल व्यक्तित्व का प्रचार नहीं किया। आमतौर पर मनोहर पार्रिकर पैरों में सैंडल ही पहनकर घूमते थे, लेकिन रक्षामंत्री के तौर पर उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौके पर सूट पहना और अपने प्रोफेशनल व्यक्तित्व का भी परिचय दिया. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी छवि को पसंद करते थे. शायद यही वजह भी होगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें गोवा से निकालकर देश की सेवा करने के लिए रक्षा मंत्री भी बनाया था।

Publicity Nahi, Asal Saadgi Ka Naam Hai 'Manohar Parrikar' | NightBulb.in

मनोहर पार्रिकर का जन्म गोवा के एक छोटे से इलाके मापूसा में हुआ था। आईआईटी से अपनी एजूकेशन पूरी करने वाले मनोहर पार्रिकर के परिवार में दो बेटे हैं। उतपल एक बेटे ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की है, वहीं दूसरा बेटा अभीजात गोवा में लोकल बिजनेस चलाता है। पत्नी का स्वर्गवास साल 2001 में हो गया था।

टेबल पर चार घंटे से ज्यादा नहीं टिकती थी फाइल

मनोहर पार्रिकर के काम करने का तरीका राजनेताओं जैसा नहीं, बल्कि एमएनसी कंपनी में टारगेट पूरा करने वाले एक कर्मचारी जैसा था। गोवा के मुख्यमंत्री और देश के रक्षामंत्री रहते हुए मनोहर पार्रिकर के पास पहुंचने वाली एक भी फाइल या दस्तावेज को पढ़ने और फाइल आगे पहुंचाने में उन्हें मात्र चार घंटे लगते थे। उनका हमेशा रिकॉर्ड 99 पर्सेंट रहा। यानी उनके पास पहुंचने वाले काम 99 पर्सेंट पूरे रहते थे।

मनोहर पार्रिकर की स्मर्ण शक्ति थी तेज

मनोहर पार्रिकर के बचपन के दोस्त संजय वालावलकर ने एक बार बताया था कि मनोहर पार्रिकर की स्मर्ण शक्ति काफी तेज थी। बचपन में एग्जाम के दिनों में पार्रिकर बाहर खेलते थे और बाकी बच्चे हर वक्त पढ़ते थे। पार्रिकर कुछ घंटे की पढ़ाई को यूं याद रखते थे कि खेल-कूद करने में अच्छा खासा समय बिताने के बाद भी पार्रिकर के नंबर सबसे ज्यादा आते थे।

प्रधानमंत्री मोदी से पीछे नहीं है पार्रिकर

जैसा की हम सभी जानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 से 18 घंटे रोजाना काम करते हैं। कुछ इसी तरह मनोहर पार्रिकर देश के उन राजनेताओं में शामिल थे, जो 16 से 18 घंटे रोजाना काम करते थे। मनोहर पार्रिकर रक्षामंत्री रहते हुए भी हमेशा 16 से 18 घंटे काम करते थे।

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जब स्कूटर पर बैठे दिखे थे पार्रिकर

मनोहर पार्रिकर को कई बार गोवा के लोगों ने स्कूटर पर सवारी करते देखा था, लेकिन एक दिन मीडिया की निगाह पड़ी और मनोहर पार्रिकर के सरल व्यक्तित्व की एक और झलक देश ने देखी। खुद गोवा के लोग कहते हैं कि जब भी कहीं ट्रैफिक में पार्रिकर फंसे होते थे, तो वह टू-व्हीलर से लिफ्ट लेकर अपने ऑफिस पहुंचते थे। इतना ही नहीं, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर बताते हैं कि एक बार सड़क पर एक्सीडेंट होने पर मनोहर पार्रिकर ने जख्मी शख्स को अपनी गाड़ी से हॉस्पिटल पहुंचाया था।

लाइन तोड़ने वाले नहीं जोड़ने वाले नेता थे पार्रिकर

मनोहर पार्रिकर के व्यक्तित्व में हमेशा एक आम नागरिक की छवि दिखाई देती थी। अब वे चाहे गोवा के सीएम के तौर पर या फिर देश के रक्षामंत्री। साल 2014 में मनोहर पार्रिकर ने लाइन में खड़े होकर ही वोट डाला था। वह फोटो सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हुई थी। उस वक्त पार्रिकर गोवा के मुख्यमंत्री थे। ऐसे ही रक्षामंत्री रहते हुए उन्हें एक बार शादी में नव युगल को आर्शिवाद देने वालों की लाइन में खड़े देखा गया था। वह चुपचाप आम लोगों की तरह लाइन में लगे थे। उस वक्त भी एक लड़की ने पार्रिकर की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड की थी।

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त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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