5000 फिल्मों में गाने लिखने वाला ऐसा गीतकार, जो सिर्फ आठवीं पास था

5000 से अधिक गाने लिखे और कई गाने गाए भी। ऐसा गीतकार जिसके गानों के कारण ही कई फिल्में सुपर हिट हुईं और कई स्टार सुपर स्टार बन गए। कौन भूल सकता है, आनंद बख्शी के वो गाने जो अमर प्रेम, बॉबी, सत्यम शिवम सुदंरम, एक दूजे के लिए, चांदनी, डर, मिलन, शोले, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, जब जब फूल खिले आदि सैकड़ों फिल्मों में दर्शकों को सुनने को मिले हैं। जी हां, आज हम बात कर रहे हैं आनंद बख्शी के बारे में। आनंद बख्शी की अनसुनी बातें आज हम आपको बता रहे हैं।

  • आनंद बख्शी को सबसे पहले काम 1961 में मिला था। भगवान दादा ने बख्शी साहब से 150 रुपये में अपनी फिल्म बड़ा आदमी के लिए 4 गाने लिखवाए थे।

 

  • बख्शी साहब गायक बनना चाहते थे, लेकिन उन्हें शुरूआती फिल्मों में गाना गाने का मौका नहीं मिला। हालांकि, 1972 में उन्हें गाना गाने का मौका मिला।

 

  • आनंद बख्शी ने पहला गाना लता मंगेश्कर के साथ गाया। गाने का नाम था – बागो में बहार आई। इसके बाद आनंद बख्शी ने चरस फिल्म में भी गाना गाया- आया कि तेरी याद आई।

 

  • ताज्जुब की बात यह है कि आनंद बख्शी साहब सिर्फ 8वीं तक पढ़े- लिखे होने के बावजूद इतने नामवर गीतकार बन गए। मजेदार बात यह है कि ये उन दिनों की बात है, जब गाने में शब्दों के अर्थ होते थे। आज की तरह नहीं कि म्यूजिक के आधार पर गाने बनाए जाते हैं।

 

  • पहली फिल्म बड़े आदमी फिल्म के गाने अधिक नहीं चल सके, लेकिन अगले ही साल राज कपूर ने उनसे अपनी फिल्म मेंहदी लगी मेरे हाथ में मौका दिया और वह बॉलीवुड में चल निकले।

 

  • यों तो आनंद बख्शी ने उस दौर के सभी टॉप म्यूजीशियन के साथ काम किया, लेकिन उनकी जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारे लाल के साथ सबसे अधिक हिट रही। आनंद बख्शी को चार बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार के रूप में फिल्म फेयर अवार्ड से भी नवाजा गया था।

बख्शी साबह का जन्म रावलपिंडी में हुआ था

जुलाई 1920 में रावलपिंडी में जन्मे आनंद बचपन से ही फिल्मों के दीवाने हो गए थे और एक गायक बनने का सपना पाल बैठे थे। लेकिन घर वाले उनकी इस इच्छा के सख्त खिलाफ थे। यही वजह रही कि वह 18 साल की उम्र में ही घर से भाग निकले। 18 साल की उम्र में आनंद फौज में भर्ती हो गए और 1947 के बंटवारे के बाद उनका परिवार लखनऊ आ गया। यहां टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी कर ली और अपने सपने को पूराने के लिए मुंबई के चक्कर लगा लिया करते थे। 30 मार्च, 2002 को मुंबई में उनका निधन हुआ।

 

 

Leave a reply:

Your email address will not be published.

Site Footer