तीन हज़ार साल पहले भी कंडोम का इस्तेमाल होता था

आज आपको बाज़ार में हर तरह का कंडोम मिल जाएगा, तरह तरह के रंगों में, टैक्सचर में, कई फ्लैवर के साथ। लेकिन आप जानते हैं कि कंडोम का इतिहास कितना पुराना है? सौ-दो सौ साल? नहीं जनाब पीछे जाइए। हज़ार साल? उससे भी पीछे, तीन हज़ार साल पहले भी कंडोम का इस्तेमाल होता था।
कंडोम शब्द कहां से आया, इसकी उत्पत्ति कैसे हुई, इसके बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। कुछ लोगों का मानना है कि इसका नाम डॉ. कंडोम के नाम पर रखा गया। यह डॉक्टर इंग्लैंड के किंग चार्ल्स सेकेंड को कंडोम सप्लाई करता था। ये कंडोम पशुओं के अंगों से बना होता था। इसे नाजायज संतानों के जन्म को रोकने के लिए और वैश्याओं से लगने वाली बीमारियों से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। कुछ लोगों का मानना है कि यह नाम डॉ. कंडन या कर्नल कंडम के नाम से बिगड़कर बना। कुछ अन्य लोग इस शब्द का जन्म लेटिन शब्द कंडोस से मानते हैं। यह मान्यता ज्यादा विश्वसनीय लगती है। खैर, जहां से भी यह शब्द आया हो, आज यह अंग्रेजी का बहुत ही जाना माना शब्द है।
अब जरा इसके इतिहास की ओर चलें।
– ईसा पूर्व 1350 से 1220 के दौरान मिस्र में कबीलों के लोग इन्फैक्शन, चोट या कीडों के डंक से बचने के लिए कंडोम का प्रयोग करते थे। दूसरी और तीसरी सदी के दक्षिणी फ्रांस के गुफा चित्रों में मौजूद चित्रों को देखने से लगता है कि दूसरी सदी के यूरोपवासी कंडोम का इस्तेमाल करते थे।
– सोलहवीं सदी में एक इटेलियन रोगविज्ञानी गेब्रियल फेलोपियस ने कपड़े के बने कंडोम का आविष्कार किया और उसने 1100 पुरुषों में सिफलिस टेस्ट किया। यानी इस कंडोम को लगाने के बाद इन लोगों का सिफलिस के रोगियों से संसर्ग कराया और इनमें से किसी को भी इस रोग का इनफैक्शन नहीं लगा। इसी सदी में कंडोम में पहली बार सुधार भी किया गया। इसके लिए प्रयोग में आने वाले कपड़े को इस्तेमाल से पहले कीटाणुरोधी रसायन में भिगो कर सुखाया जाता था। ये पहले ऐसे कंडोम थे जो शुक्राणुओं को मार सकते थे।
– ऐतिहासिक दस्तावेजों में इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि अठारहवीं सदी में जानवरों के अंगों से बने कंडोमों का इस्तेमाल किया जाता था। ये बहुत मंहगे होते थे इसलिए इनका इस्तेमाल कम ही लोग कर पाते थे। उस जमाने में कंडोम को ‘भरपूर मजे लेने और इनफैक्शन से बचाव’ के साधन के रूप में प्रचारित किया जाता था।
– 1758 में फ्रांस के बदनाम आशिक कसानोवा के बारे में भी कहा जाता था कि वह अपनी प्रेमिकाओं को प्रेग्नेंट होने से बचाने के लिए कंडोम का प्रयोग करता था।
– उन्नीसवीं सदी में जापान में दो तरह के कंडोम का प्रयोग होता था। एक कायोगाता या कयोताई कंडोम थे जो पतले पतले चमड़े के बने होते थे और दूसरे काबुतोगाता कंडोम होते थे जो कछुए के ऊपरी आवरण से बनाए जाते थे। घबरा गए न। काफी दर्दनाक अनुभव होता होगा।
– कंडोम के बाज़ार में सबसे बड़ा उछाल तब आया जब 1843 में रबड़ को वेल्केनाइजेशन की विधि से मनचाहे आकार में ढालने में सफलता मिली। इस तरह कंडोम ज्यादा मात्रा में कम कीमत पर बनाए जा सकते थे। ये पुराने कंडोम के मुकाबले ज्यादा विश्वसनीय भी थे। इससे पहले कंडोम क्रेप रबड़ और सल्फर से बनाए जाते थे।
कंडोम का पहला विज्ञापन 1861 में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपा। इन्हें ‘डॉ. पावेल्स फ्रेंच प्रिवेटिव्स’ कहा गया।
– लेकिन ऐसे भी लोग थे जो कंडोम को पसंद नहीं करते थे। 1873 में कॉम्सटॉक लॉ (इसका नाम एंथनी कॉम्सटॉक के नाम पर रखा गया) के जरिए परिवार नियोजन को लेकर हर तरह के विज्ञापन पर रोक लगा दी गई। इस कानून के अनुसार अगर आप डाक से कंडोम भेजते हैं तो डाक विभाग को उन्हें जब्त कर लेने का अधिकार भी दे दिया गया।
– 1930 के दशक में क्रेप रबर की जगह कंडोम निर्माताओं को तरल रबड़ ज्यादा पसंद आया। 1935 तक अमेरिका में रोज 15 लाख कंडोम तैयार होने लगे।
– साठ के दशक में वर्ल्ड वार के बाद बच्चों के पैदा होने की रफ्तार बढ़ गई। सत्तर के दशक में प्रेम संबंधों के खुलेपन के कारण तो दुनिया की जनसंख्या तेजी से बढ़ने लगी। इसलिए 80 के दशक में बाज़ार में कंडोम की भरमार होने पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ। कंडोम जहां तहां बिकते दिखने लगे। पबों में, सुपर मार्किट में, सर्विस स्टेशन पर, यहां तक कि दूध की डेयरियों तक में कंडोम बिक रहे थे। क्योंकि लोग खुद को एच.आई.वी/एड्स से बचाना चाहते थे और अनपेक्षित गर्भ से भी बचना चाहते थे।
– 1987 में किमोनो ब्रांड के कंडोम अमेरिका के बाज़ार में पहुंच गए। ये पतले होते थे और इन पर चिकनाई लगी होती थी। इनके विज्ञापनों में कहा जाता था कि मजे के मजे और बचाव का बचाव।
– 90 के दशक में कई तरह के कंडोम बाज़ार में आए, तरह तरह के रंगों में, टैक्सचर में, कई फ्लैवर के साथ। 1993 तक आते आते नेचुरल लेटेक्स के कंडोम का सालाना निर्माण का स्तर 850 करोड़ तक पहुच गया।
– 2001 में ड्यूरेक्स ने पोलीयुरेथेन कंडोम-ड्यूरेक्स अवांती-की बिक्री शुरू की। जो थोड़े से लड़के और लड़कियां लेटेक्स को पसंद नहीं करते थे उनके पास अब इस नए कंडोम से नाक भौं सिकोड़ने का कोई कारण नहीं रह गया।

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