Night Bulb-Book Review of 'Her Last Wish' II Hindi- article, poem, blog

‘Her Last Wish’ बड़ी इच्छा

जिंदगी में कब वो मोड़ आ जाए जहां आपको अपनी सारी इच्छाएं खत्म करने के लिए मजबूर होना पड़े। अब यह दिन जिंदगी का आखिरी दिन भी हो सकता है या एक ऐसी स्थिति जब आप अपनी इच्छाएं पुरी करने में असमर्थ हों। तो क्यूं न आज ही एक ऐसी लिस्ट बनाकर तैयार की जाए, जिन कामों या इच्छओं को आप अपनी जिंदगी में पूरा करना चाहते हों।

यह इच्छाएं कुछ भी हो सकती हैं। हां, इच्छाएं हर इंसान की अलग-अलग होती हैं। कोई जिंदगी में दुनिया के हर कोने में घूमना चाहता है, कोई सलमान खान या लड़कियों में केटरीना कैफ भी बनना चाहता होगा। लेकिन मैं जिन इच्छाओं की यहां बात कर रहा हूं, वह इच्छाएं बहुत छोटी और प्यारी होती हैं।

कल ही मैंने यंग राइटर ‘अजय कुमार पांडे’ की नॉवेल ‘HER LAST WISH’ पढ़ी। नॉवेल बेस्टसेलर बुक में शामिल हो चुकी है। इस नॉवेल में एक कपल्स के प्यार की एक अनोखी कहानी है। हस्बैंड का नाम विजय है और आस्था यानी उसकी पत्नी उसको बड़ी मुश्किलों के बाद मिली है। दरअसल, विजय एक एेसा इंसान है जो आत्म विश्वास की कमी के कारण कम बोलता है और कम कमाता है।

विजय अपनी जिंदगी में 14 लड़कियों से रिजेक्ट होकर आस्था को पाने में कामयाब हुआ है। वहीं, आस्था एक ऐसी लड़की है जिसने भले ही अपने परिवार में कई परेशानियां झेली हों, लेकिन वह एक आत्मविश्वासी मॉर्डन लड़की है। उसे पार्टियां करना, नॉन वेज खाना काफी पसंद है, जबकि विजय सीधे स्वभाव का लड़का है, जो सिर्फ घर की रोटी में ही खुश है।

कुछ समय बाद जब हस्बैंड विजय को जब पता चलता है कि उसकी पत्नी एचआईवी जैसी बड़ी बीमारी से ग्रस्त है और उसके पास कुछ ही दिन बचे हैं। वह उन दिनों को खास बनाने के लिए उसकी उन इच्छओं को पूरा करने में लग जाता है, जो आस्था ने पांच ‘वोडका शॉट’ पीकर लिखी थीं। यानी वो इच्छाएं जो एक मिडिल क्लास हस्बैंड के लिए आसान नहीं था। वो क्या इच्छाएं थी, उसे पढ़ने के लिए आपको नॉवेल पढ़नी होगी। हालांकि, वो इच्छाएं कुछ ऐसी थीं, जिन्हें पूरा करना विजय के लिए मुश्किल तो था, लेकिन नामुमकिन नहीं।

कुछ ऐसे ही हमारी जिंदगी में भी कुछ ऐसी इच्छाएं होती हैं, जिन्हें हम लिखना इसलिए बेहतर नहीं समझते, क्यूंकि हम उन इच्छाओं को लिखकर याद रखना बेहतर नहीं समझते। आप जानते हैं, इसके पीछे असल वजह  बस उन्हें तवज्जो देना नहीं होता। दरअसल, आजकल हम उस भंवरजाल में फंसकर रह गए हैं, जिसमें हम जिंदगी की बड़ी-बड़ी इच्छाओं को पूरा करने  में जुट जाते हैं और उनके पूरा न होने में परेशान रहने लगते हैं। जैसे- तालाब में बड़ी-बड़ी मछलियों के बीच छोटी मछली जीवित नहीं रह पाती। कुछ ऐसे ही हमारी इच्छाएं भी हैं, जिसमें बड़ी के सामने छोटी इच्छाएं तो टिक ही नहीं पातीं। यह छोटी इच्छाएं इतनी तो अहमियत तो रखती हैं, जिन्हें आप कहीं किसी डायरी या पन्ने पर लिखकर याद जरूर रखें। मेरा मानना है, अगर आप उन इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करेंगे और पूरा करने में कामयाब होते हैं, तो वो खुशी आप भूले से भी भुला नहीं सकते।

HER LAST WISH‘ नॉवेल से मैंने कुछ पक्तियां उठाई हैं और उन्हें कविता में तब्दील भी किया है। आशा करता हूं आपको पसंद आएंगी।

समय के साथ- साथ जिंदगी के पन्ने पलट ते जाएंगे,
पहला नहीं आखिरी अध्याय में हम अपनी योग्यताएं गिनाएंगे
वो वक्त होगा जब हम आज के दर्द को भूल जाएंगे,
तब हम जिंदगी में लिखे किसी और दर्द का साथ निभाएंगे।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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