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कैसे बनें मेट्रो ड्राइवर? आइए जानते हैं

मेट्रो जैसे हाईटेक ट्रांसपोर्ट पर न सिर्फ सफर करने का रुख है, बल्कि कुछ लोगों को इस ट्रांसपोर्ट को चलाने की चाह भी होती है। दिल्ली समेत कई शहरों में मेट्रो ट्रांसपोर्ट की शुरूआत होने से भी यूथ के बीच मेट्रो ड्राइविंग के लिए क्रेज बढ़ा है। कई बच्चे ऐसे भी हैं, जो मेट्रो के कूल इन्वायरमेंट में अन्य डिपार्टमेंट में भी नौकरी करना चाहते हैं। हम इस खबर से आपको बताना चाहते हैं कि किस तरह की ट्रेनिंग पाकर आप एक मेेट्रो ड्राइवर के लिए चुने जा सकते हैं या फिर कहें कि अपने सपने को पूरा कर सकते हैं। इसके लिए किस तरह की ट्रेनिंग दी जाती है, क्या क्वालिफिकेशन चाहिए? ट्रेनिंग में क्या खास होता है? जानते हैं विस्तार से

ड्राइविंग के लिए डीएमआरसी की स्पेशल ट्रेनिंग

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन स्टेशन कंट्रोलर और ट्रेन ऑपरेटर के लिए 27 से 28 हफ्तों की एक स्पेशल ट्रेनिंग देती है। इस ट्रेनिंग के अंदर कई हाई क्लास टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाता है। इस ट्रेनिंग में टीचिंग स्टेप बाई स्टेप दी जाती है। सबसे पहले ट्रेनिंग डीएमआरसी के नियम, कानून आदि के बारे में दी जाती है। सभी बेसिक जानकारी के बाद मेट्रो सिग्नल सिस्टम और स्टेशन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग देता है। खास बात यह है कि यह सभी जानकारियां डीएमआरसी हाई टेक्नोलॉजी से लैस मशीनों से देती है।

ट्रेनिंग के अंदर मेट्रो चलाने से जुड़ी जानकारी एक बनावटी मॉडल के जरिए दी जाती है। डीएमआरसी ट्रेनिंग के लिए जिस बनावटी मॉडल को प्रयोग करती है, वह टेक्नोलॉजी दुनिया भर में प्रयोग की जाती है। एक बनावटी मेट्रो पर ड्राइविंग सिखाई जाती है, जो कि बिलकुल मेट्रो के असली केबिन जैसी होती है। इस केबिन में वह सभी यंत्र फिट होते हैं, जो असली मेट्रो में लगे होते हैं। इस ट्रेनिंग के बाद एक रूट ऑन ट्रेक भी चलवाया जाता है, ताकि ड्राइविंग की पुष्टि की जा सके और अंत में कम्यूनिकेशन स्किल्स को डेवलप करने की ट्रेनिंग दी जाती है।

बेसिक क्वालिफिकेशन

डीएमआरसी में ट्रेन ऑपरेटर यानी मेट्रो ड्राइवर के लिए सबसे पहले एक एग्जाम होता है, जिसके लिए कुछ दस्तावेज जरूरी होते हैं। एग्जाम की सबसे पहली डिमांड तीन साल का इलेक्ट्रिकल में इंजीनियरिंग डिप्लोमा है। अगर यह डिप्लोमा नहीं है तो प्रत्याशी को एग्जाम में बैठने के लिए फीजिक्स, कैमिस्ट्री या मैथ्स में बीएससी ऑनर की डिग्री होल्डर होना जरूरी है। एग्जाम में बैठने के लिए प्रत्याशी की उम्र 18 से 28 वर्ष होनी चाहिए।

एग्जाम सेलेक्शन प्रॉसेज

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन का सेलेक्शन प्रॉसेज भी एडवांस है। मेट्रो ऑपरेटर बनने के लिए सबसे पहले दो रिटेन टेस्ट पास करने होते हैं, जिसके बाद एक स्पेशल टेस्ट लिया जाता है, जिसे साइको टेस्ट कहते हैं। डीएमआरसी इस टेस्ट के अंदर प्रत्याशी के मनोरोगी होने का पता लगाती है। यह टेस्ट इसलिए जरूर होता है कि कहीं कोई ड्राइवर अपना आपा न खो बैठे। साइको टेस्ट के बाद एक पर्सनल इंटरव्यू और अंत में ए वन मेडिकल टेस्ट किया जाता है, जिसके बाद ट्रेन ऑपरेटर का पद हासिल होता है।

दिल्ली मेट्रो को चलाने वाले विभाग दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारी ने हमें बताया कि जो एग्जाम के बाद जो प्रत्याशी बतौर ट्रेन ऑपरेटर के लिए चुने जाते हैं, उन्हें ड्राइविंग की ट्रेनिंग बिलकुल सेफ इन्वायरमेंट में दी जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना न हो। ट्रेनिंग का समय 27 से 28 हफ्ते होता है, जिसमें काफी अच्छे से उन्हें ड्राइविंग के साथ मेट्रो, स्टेशन, सिग्नल आदि सभी जुड़ी जानकारियां होती हैं। जानकारियां इसलिए देनी जरूरी होती है कि आपातकालीन स्थिति हो, तो उससे कैसे निपटा जा सके।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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