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दिल में बसी बातें

दिल में बसी बातें दबाना

इंसान की कमजोरी होती है,

खुले मन से जो खुलकर कहे,

उसी की असल में जीत होती है।

 

निजी जिंदगी में कुछ खोते हैं,

तो कुछ बहुत कुछ पाते हैं

जो अपनी नजरों को खुद से न मिला सके,

उसकी वही जीत सबसे बड़ी हार होती है।

 

मुश्किल भी हो तो क्या हुआ,

करो अपनी सच्चाई का खुद से सामना,

 

ये और वो क्या कहेंगे, क्या यही सोचकर

चाहते हो जिंदगी का हर पल गुजारना

होती हैं गलतियां और आगे भी होंगी,

दिल से लिए कदम की कभी न कभी जीत होगी

 

मैं मानूं तो मानना यह आपकी मर्जी है,

अपनी ख्वाहिश पूरी करूं ऐसी हर चीज मुझे करनी है।

रोके कोई तो रुक न पाऊं ऐसी दृढ़ता मुझे रखनी है

वरना ‘लोग क्या कहेंगे’, यही बात हमेशा जहन में रहनी है।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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