Devender Sharma – Doctor Death : 50 Taxi Drivers की मौत के बाद गिनती करना भूल गया था || Crime Scene

. फर्जी गैस एजेंसी की शुरूआत
. गैस एजेंसी के लिए गैस सिलेंडर ले जाने वाले ट्रकों की चोरी
. ट्रक ड्राइवर को मार देना और ट्रक के पुर्जे पुर्जे अलग करके बेच देना
. चोरी की गाड़ियों का कारोबार
. टैक्सी बुक करना फिर टैक्सी वाले का मारकर उसकी गाड़ी बेच देना
. किडनी ट्रांस प्लांट का धंधा

देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डैथ. साउंड

पेशे से आयुर्वेद का डॉक्टर और काम सीरियल किलर वाले. 50 लोगों की जान लेने के बाद अपनी गिनती भूलने वाला यह ​हत्यारा हत्या करने के अलावा ऐसे ऐसे काले धंधे करता था, जिसको आप सुनेंगे तो ऐसा महसूस करेंगे, जैसे मानों किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी सुन रहे हों. नमस्कार, मैं हूं त्रिभुवन शर्मा और आपको आज बताउंगा तस्वीर में दिखाई दे रहे इस सीरियल किलर की पूरी कहानी.

मिडिल क्लास फैमिली में पैदा होने वाला एक लड़का कॉलेज से एक दिन डिग्री लेकर घर लौटता है. उसकी डिग्री को देख मां बाप खुश हो जाते हैं. बेटा यानी देवेंद्र शर्मा अपनी डिग्री की बदौलत साल 1984 में एक क्लीनिक खोलता है. क्लीनिक में अपनी डिग्री दिवार पर टांगकर अपने भविष्य को उज्जवल बनाने के सपने देखने लगता है.

उसकी क्राइम स्टोरी तो तब शुरू होती है, जब देवेंद्र इस काम को 10 साल तक करने के बावजूद ज्यादा अच्छा कमा नहीं पाता और अलग अलग बिजनेस करने की कोशिशों में लग जाता है. 11 साल तक ​क्लीनिक चलाने के बाद देवेंद्र एक गैस एजेंसी लेता है, लेकिन काम ठीक ना चल पाने के कारण उसका पैसा डूब जाता है. हताश देवेंद्र शर्मा अपनी हार को या तो बर्दाश्त नहीं कर पाता या फिर से मेहनत करने की बजाय काले कारनामों की ओर बढ़ने का फैसला कर लेता है. यह तो आज तक पता नहीं चल पाया कि क्या वजह थी कि साल 1984 में बिहार के बेचलर आफ आयुर्वेद, मेडिसिन एंड सर्जरी से डिग्री हासिल करने वाला देवेंद्र 1995 में डॉक्टर देंवेंद्र शर्मा बनने की बजाय डॉक्टर डैथ के नाम से क्यूं बना.

डॉक्टर देंवेद्र से डॉक्टर डैथ बनने की कहानी उसकी एक फर्जी गैस एजेंसी से शुरू होती है. देवेंद्र फर्जी गैस एजेंसी चलाने के लिए अपना एक लोकल गैंग तैयार करता है, जो हाइवे पर
एलपीजी सिलैंडर की सप्लाई वाले ट्रकों को रोकते थे और ड्राइवर को मारकर सारे सिलेंडर चोरी कर लेते थे. यहां देखने वाली बात यह है कि सिलेंडर भी चोरी कर लिए और ड्राइवर को भी मार दिया, तो ट्रक का क्या किया.

यही सवाल, देवेंद्र के जहन में भी आया, जहां से उसने गाड़ि​यों की चोरी का भी धंधा शुरू कर दिया. देवेंद्र ने इस काम के लिए भी खुद के साथ — साथ अपने गैंग को भी ट्रेंड किया. रिपोर्टर्स के अनुसार, देवेंद्र ने ट्रकों को तो डिस्मेंटल किया और ट्रकों के पूर्जे पूर्जे करके बेच दिए. इसके अलावा उसने टैक्सी ड्राइवरों को भी निशाना बनाया. यहां वो और उसका गैंग पहले टैक्सी को हायर करते ​थे, फिर ड्राइवर का कत्ल करके टैक्सियों को चोर मार्केट में बेचना दिया करते थे.
देवेंद्र और उसका गैंग चोरी की गाड़ियों का धंधा उत्तरप्रदेश की चोर मार्केट में किया करता था. यहां उसको एक गाड़ी की कीमत 25 से 30 हजार रुपये मिलती थी. देवेंद्र और उसके गैंग ने 100 से ​अधिक ट्रक और टैक्सी ड्राइवरों को मारा था. देवेंद्र से जब पुलिस ने पूछा कि उसने कितने लोगों को अभी तक मारा है, तो उसने बताया कि 50 को मारने के बाद उसने गिनती करनी बंद कर दी थी और सबूत मिटाने के लिए वो ड्राइवरों को मारने के बाद उनके टुकड़े करके मगरमच्छ वाले तालाब में फेंक देता था.

इसके अलावा अब देवेंद्र का एक और चैहरा आपको बताते हैं. देवेंद्र जिस वक्त फर्जी गैस एजेंसी, चोरी की गाड़ियों का धंधा और ड्राइवरों की हत्या कर रहा था. उसी वक्त उसने एक और रैकेट चोरी छुपे चलाया हुआ था. यह रैकेट था किडनी ट्रांसप्लांट का. देवेंद्र किडनी ट्रांसप्लांट का भी रैकेट चलाता था. पुलिस को इंट्रागेशन के वक्त उसने बताया था कि उसने साल 1994 से 2004 के बीच 125 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका था. देवेंद्र को एक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 5 से 7 लाख रुपये मिलते थे.

किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट चलाते हुए उसको पहली बार पकड़ा गया था. साल 2004 में देंवेंद्र को एक टैक्सी ड्राइवर की मौत के मामले में राजस्थान कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इसके बाद साल 2007 में देवेंद्र और उसके दो साथियों को फरीदाबाद की कोर्ट ने दोषी पाया. धीरे धीरे परतें खुलती रहीं और उसको 21 टैक्सी ड्राइवरों की मौत का दोषी करार दिया गया. मई, 2018 में गुरुग्राम में उसको नरेश वर्मा नाम के एक टैक्सी ड्राइवर की हत्या के जुल्म में मौत की सजा सुनाई गई. हालांकि, 16 साल तक जेल में रहने के बाद उसे जनवरी 2020 में 20 दिन की पैरोल पर जेल से छोड़ा गया था. यहां भी उसने कानून को चख्मा देने की कोशिश की और पैरोल खत्म होने के बावजूद वापस नहीं लौटा. आखिर में जुलाई 2020 में देवेंद्र शर्मा को दिल्ली के इलाके से पकड़ा गया और अब देवेंद्र शर्मा तिहाड़ जेल में बंद है.

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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