हिंदूओं के मंदिर से इतनी नफरत क्यूं. पाकिस्तान में लगातार दूसरी बार जिहादियों का मंदिर पर हमला

पाकिस्तान में हिंदूओं और हिंदूओं के धार्मिक स्थल पर हमला कोई नई बात नहीं है. शायद यही वजह भी है कि थक हारकर हिंदू अपनी पुश्तेनी जमीन और अपने कारोबार को जस का तस छोड़कर भारत में आते है और यहां वो लोग एक गरीब की जिंदगी जीने में भी कोई गुरेज नहीं करते. करेंगे भी क्यूं भारत में कम से कम उनका और उनके परिवार का जीवन सुरिक्षत तो है. जहां पाकिस्तान में हिंदू ल़़डकियों को अगवा कर उनके साथ जबरन निकाह की घटनाएं भी आम हैं, यहां कम से कम वह अपनी बेटियों को महफूस तो रख सकते हैं।

मोदी सरकार का नागरिकता कानून में संशोधन करके ऐसे परिवारों को नागरिकता करना एक जीवनदान देने के बराबर है. अब आपको बताते हैं कि पाकिस्तान में हाल ही में आखिर हुआ क्या है.

दरअसल, पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदूओं के मंदिर को तोड़ा गया है. हिंदूओं से नफरत करने वाले दस से 12 ​जिहादी आते हैं और मंदिर में तोड़फोड़ करके चले जाते हैं. यह मंदिर 74 साल पुराना बताया जा रहा है. हालांकि, ऐसा पाकिस्तान में पहली बार नहीं हुआ है. पिछले साल दिसंबर में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक मौलवी के उकसावे पर भीड़ ने हिंदूओं के ऐतिहासिक मंदिर को तोड़ दिया था, जला दिया था. भारत सरकार ने जब इस मामले पर गंभीरता दिखाई और पाकिस्तान सरकार की आलोचना की, तब जाकर वहां की स्थानीय सरकार ने मंदिर के पुननिर्माण कराने की घोषणा की थी.

जो हमला अभी हुआ है, उस पर पाकिस्तान की स्थानीय पुलिस का कहना है कि पिछले महीने से इस मंदिर के पुनर्निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा था। इसके चलते मंदिर में फिलहाल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान नहीं हो रहे थे। मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां भी नहीं थीं। मंदिर के बाहरी हिस्से में दरवाजों और सीढ़ियों को जिहादियों ने नुकसान पहुंचाया है। निर्माण कार्य में बाधा भी आई है।

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