शफीक और अब्बू की फैकट्री से CAA दंगों में हुई थी हथियारों की सप्लाई

सिटिजनशिप अमेंडमेंड एक्ट एक संशोधन की बजाय देश में दंगे भड़काने का हथियार कुछ लोगों ने समझा हुआ था. यही वजह है कि पिछले साल हुए दंगों में भारी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल किया गया था और जहां से इन हथियारों की सप्लाई चल रही थी, उस फैक्ट्री तक यूपी एसटीएफ आज पहुंच गई, जहां से शफीक और अब्बू नाम के दो को एसटीएफ ने पकड़ा है. शफीक और अब्बू के घर में हथियार बनाने की फैकट्री चल रही थी. इसी फैकट्री से यूपी के कुख्यात बदमाशों और सीएए के दंगों में इस्तेमाल के लिए हथियारों की सप्लाई हुई थी. और तो और आने वाले पंचायत चुनावों के लिए भी शफीक और अब्बू की फैकट्री से हथियार सप्लाई किए जा रहे थे.

दैनिक अखबार दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट में लिखा है कि एसटीएफ की टीम और मेरठ पुलिस की टीम ने 27 मार्च की सुबह छापेमारी करके चार फैकट्री का खुलासा किया, जहां से 133 अवैध हथियारों के साथ आठ को ​दबोच लिया है. एसटीएफ अभी और फैक्‍ट्रीयों की तलाश कर रही है।

एसटीएफ की पूछताछ में शफीक अहमद और अब्बू उर्फ तबरेज ने बताया कि पिस्टल की कीमत 25 हजार रुपये और तमंचा तीन से चार हजार रुपये के बीच बेच देते थे. अब्बू एक किराए का मकान लेकर फैक्ट्री चला रहा था, जबकि शफीक अलग अलग फैक्ट्री में हथियारों के पार्ट्स बनवाकर उन्हें एक फैक्ट्री में लाकर हथियार तैयार कर रहा था।

इस समय शफीक और अब्बू बड़े पैमाने पर तमंचे बना रहे थे, क्योंकि पंचायत चुनाव के लिए तमंचे के आर्डर मिल रहे थे। पुलिस हथियारों की खरीद-फरोख्त करने वाले आरोपियों की धरपकड़ कर रही है।

दरअसल, पंचायत चुनाव के मद्देनजर पश्चिमी में हथियारों की फैक्‍ट्री पर पुलिस और एसटीएफ की टीम लगातार छापेमारी कर रही है।

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