जानिए, बुरहान वानी को जब मारा, तो देशद्रोहियो ने क्या क्या किया था

आज सेना ने शोपिया जिले में चार आतंकियों को मार गिराया, जो ​एक मस्जिद में छुपे बैठे थे. इन चार आतंकियों में बुरहान वानी का भाई भी मारा गया है, जिसका नाम इ​म्तीयाज शाह बताया जा रहा है. बुरहान वानी को सेना ने 8 जुलाई 2016 के दिन मारा था. बुराहन साल 1994 में पैदा हुआ था, कश्मीर के एक स्कूल के हैडमास्टर का लड़का था और आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा हुआ था.

बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उसकी शवयात्रा में 2 लाख लोग शामिल हुए थे. कहा जाता है कि इतनी बड़ी संख्या में अभी तक कोई शवयात्रा नहीं निकली है. इस शवयात्रा में कई आतंकी भी शामिल हुए थे, जिन्हें सेना ने एक एक करके हूरों के पास पहुंचा दिया था. बुरहान वानी को पाकिस्तान के झंडे में लपटेकर क​ब्रीस्तान ले जाया गया था.

बुरहान की मौत के बाद कश्मीर में ना सिर्फ जगह जगह पत्थरबाजी हुई, बल्कि हुर्रियत नेताओं ने कश्मीर बंद करने तक का एलान कर दिया था. पुलिस स्टेशन और सिक्योरिटी फोर्स के ठिकानों पर भीड़ ने हमले भी किए थे. सेना पर पत्थरबाजी करने के साथ साथ बुरहान वानी के समर्थकों ने कश्मीरी पंडितों के कैंप पर भी हमला किया था. नेशनल हाइवें बंद होने के साथ साथ ट्रेन सेवा भी जम्मू कश्मीर में ठप्प हो गई थी.

अमरनाथ यात्रा को भी बार बार बंद कर दिया गया था. बुरहान के समर्थकों ने उस घर को भी जला दिया था, जिस घर में बुरहान को सेना ने मारा था. दरअसल, उनका मानना था कि बुरहान के छुपे होने की जानकारी मकान मालिक ने दी होगी.

इस हिसंक माहौल की वजह से 90 लोगों की मौत हुई थी और लगभग 15000 हजार कश्मीरी घायल हुए थे. उस वक्त उमर अब्दुल्लाह ने कहा था कि बुरहान वानी कश्मीर में एक नया सितारा बन गया है, जिसको ध्यान में रखकर काफी बड़ी संख्या में कश्मीरी आतंक का रास्ता चुनेंगे. ऐसी ही कुछ कहना पीडीपी के नेता मुजफ्फर हुसैन का था, जो बुरहान वानी की मौत की जांच करवाना चाहते थे. उनका कहना था कि बुरहान के लिए स्टेंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर नहीं अपनाए गए, जबकि उनकी मांग को उस वक्त के डिप्टी चीफ मिनिस्टर निर्मल सिंह को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बुरहान वानी को मारा जाना एक एंटी टेरेरिस्ट आपरेशन का हिस्सा है, जिसकी इंक्वायरी की कोई जरूरत नहीं है.

यह मामला देखते हुए पाकिस्तान कैसे रुक सकता था. पाकिस्तान के उस वक्त के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 12 जुलाई को शहीद और कश्मीरी युवाओं को नेता कहा था. हालांकि, जिसकी भारत की सरकार आलोचना भी की, साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने लगे हाथ लेते हुए कहा कि जो लोग आतंक को पनाह देते हैं, वो बुरहान वानी जैसे आतंकी को अपना हीरो मानते हैं.

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