जब एक हमले ने “Indira Gandhi” की नाक तोड़ दी थी

पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अ​रविंद केजरीवाल और अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी.

चुनावों के वक्त बड़े चेहरों पर थप्पड़, अंडे, टमाटर, पत्थर या किसी तरह के अन्य हमले करना नई बात नहीं है. हालांकि, यह नुस्खा नेताओं को जीत दिलाने के लिए काफी काम आता दिखाई दिया है. दरअसल, ऐसा एक मामला 1967 के चुनावों में देखने को मिला था, जब देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नाक टूट गई थी.

जी हां, 1967 में चुनावों का दौर था और इंदिरा गांधी का रुतबा उस वक्त उतना नहीं था, जितना उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद हुआ. इंदिरा उड़ीसा में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रही थीं कि तभी स्टेज के सामने खड़ी भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी. उड़ीसा में उन दिनों स्वतंत्र पार्टी का दबदबा था और इंदिरा गांधी को कोई ढंग से सुन नहीं रहा था, हालांकि, पत्थरबाजी के बावजूद इंदिरा बोलती रहीं.

उन्होंने कहा, “क्या इसी तरह आप देश को बनाएंगे? क्या आप इसी तरह के लोगों को वोट देंगे।” उनके यह लाइन बोलने के बाद तुरंत उड़ता हुआ एक पत्थर उनकी नाक पर जाकर लगा. पत्थर लगते ही उनकी नाक से खून बहने लगा. इंदिरा ने बहते हुए खून को अपने हाथों से पोंछा. कुछ समय बाद खून तो रुक गया, लेकिन उनकी नाक की हड्डी टूट गई थी.

जैसे आज ममता बेनर्जी से जुड़ी खबरें आ रही हैं कि ममता व्हील चेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार करेंगी, ठीक उसी तरह उस वक्त इंदिरा गांधी ने भी चेहरे पर प्लाटर लगे होने के बावजूद देश में उसी शक्ल के साथ प्रचार किया.

आपको याद होगा कि अरविंद केजरीवाल की भी एक रोडशो में चांटा जड़ दिया था, जिसके बाद अ​रविंद केजरीवाल ने भी अपना चुनाव प्रचार नहीं रोका था. हालांकि, कुछ समय के लिए वह राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर बैठने चले गए थे.

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